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वक़्त

वक़्त - 1

वक़्त पृथ्वी की छाती पर धड़क रहा है
और हमारी छाती पर
धड़क रही है पृथ्वी

वक़्त - 2

रेत का कण 
वक़्त के इतिहास का एक अध्याय है
और हमारा अध्याय
वक़्त का इतिहास है।

वक़्त - 3

बादल के होंठो पर वक़्त की लालिमा है
और हम पृथ्वी के होंठो पर
घूम रहे हैं
गुरुत्वाकर्षण के नियम से बंधे हुए।

वक़्त - 4

ब्रह्मांड बिखर रहा है अंदर से
और हमारा बिखराव
वक़्त के कैलेंडर पर
दिनों के माफ़िक 
चिपका हुआ है।

वक़्त - 5

वक़्त मेरे जूते के अंदर
आकाश में छिपा हुआ है
मेरे पैर की धड़कनें
आकाश में वक़्त की खूँटी पर टंगी हैं।

मार्च 2021
--'अनपढ़'

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Dr. Deepak Bijalwan
Poet, Translator