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गज़ल (....क्या हो चला हूँ मैं)

महज़ आइनों को ख़बर हुई कि क्या हो चला हूँ मैं ...पर किन्हीं खयालों को चेहरा मिलने से बस 'मैं ' हो चला हूँ मैं मैं और तू के फासलों से परे उतरना ......बस समंदर में वरना बूँद-बूँद ...और ..दरिया-दर...