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Showing posts with the label अश्क

ओ साथी!

रात सुनाई पड़ रही है कुछ बोलती सी घटा खुद में घुले अश्कों को है तोलती सी बहुत ही हाँफकर क्यों हो डगर में आओ मैं हूँ साथ बैठो छाँव में ओ साथी! अधूरी अधूरी सी लगती है दुनिया न तेरी ...

ख़ामोश सिसकियाँ...

एक ख्वाब उतरकर तुम्हारी आँखों से गुम है मेरे उन अश्कों में जो सिर्फ अंदर ही रह गए। उम्मीद की छड़ी टेके हुए उन आंखों में ख्वाबों की खिड़की से तमाम रौशनी घर की हर एक चीज को रोशन क...

दरिया-ए-दर्द।

कहाँ तक डुबोने का मन है मुझे ऐ दरिया-ए-दर्द, आ का तुझमे घुल जाऊं ...तसल्ली से दरिया-ए दर्द। वो के छूकर बहुत गहरा निकल गया मुस्कुराकर, पता बहुत देर से हुआ कि ...वो तो था ही बस बेदर्द। अ...