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Showing posts with the label टूटना

क्या इस बीच...?

नज़र नही आता एक कतरा भी रौशनी का कि मैने जान के खुद को बाँधा या मैं बंधता चला गया, लेकिन बहुत वक़्त तक भटकाव ने चोटिल किया फैली हुई जमीन जो कि दिल और दिमाग के बीच है वहीं पर। इस बी...

समझ नहीं आता...

ये किरदार न जाने क्यों समझ नहीं आता कि जाने, क्या कहते-कहते रुक जाना समझ नहीं आता। परिन्दों ने बनाया खूबसूरत आसमां को है, पर कुछ परिंदों का यूं लौटके न आना समझ नहीं आता। कहाँ ...